अमेरिकी ऑटोमोबाइल कंपनी फोर्ड द्वारा भारत से कारोबार समेटने के फैसले से भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर को बड़ा झटका लगा है। वह पिछले 4 सालों में भारत से कारोबार समेटने वाली तीसरी बड़ी अमेरिकी ऑटोमोबाइल कंपनी है। एक और तीन कंपनियां देश छोड़कर जा चुकी है तो दूसरी ओर टेस्ला इलेक्ट्रिक वाहनों भारत में वाहन निर्माण करना चाहती है। हालांकि उसने विशेष रियायत की मांग की है।
फोर्ड मोटर्स ने क्यों बंद किए संयंत्र : अमेरिका की प्रमुख वाहन कंपनी फोर्ड मोटर ने आखिरकार पुनर्गठन के प्रयासों के तहत भारत में अपने 2 विनिर्माण संयंत्र बंद करने और देश में केवल आयातित वाहनों की बिक्री करने का फैसला किया है। कंपनी ने कहा कि इन संयंत्रों से उत्पादित इकोस्पोर्ट, फिगो और एस्पायर जैसे वाहनों की बिक्री बंद कर देगी।
फोर्ड मोटर्स ने क्यों बंद किए संयंत्र : अमेरिका की प्रमुख वाहन कंपनी फोर्ड मोटर ने आखिरकार पुनर्गठन के प्रयासों के तहत भारत में अपने 2 विनिर्माण संयंत्र बंद करने और देश में केवल आयातित वाहनों की बिक्री करने का फैसला किया है। कंपनी ने कहा कि इन संयंत्रों से उत्पादित इकोस्पोर्ट, फिगो और एस्पायर जैसे वाहनों की बिक्री बंद कर देगी।
पिछले 10 वर्षों में दो अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हो चुका है।
इसका सबसे बड़ा कारण भारत में प्रतिस्पर्धा रहा है और साथ में भारत सरकार की नीतियां भी रही जिससे भारत सरकार ने घरेलू निर्माताओं को बढ़ावा देना भी है जिसमें मेक इन इंडिया जैसी योजना शामिल है। अब देखना होगा कि भारत सरकार इसमें क्या करती है।
भारत में मार्केट शेयर के हिसाब से कंपनी पिछड़ भी रही थी और उसकी ऑपरेटिंग लागत लगातार बढ़ रही थी , कंपनी ग्राहकों का ध्यान खींचने में लगातार विफल रही है।
इसका सबसे बड़ा कारण भारत में प्रतिस्पर्धा रहा है और साथ में भारत सरकार की नीतियां भी रही जिससे भारत सरकार ने घरेलू निर्माताओं को बढ़ावा देना भी है जिसमें मेक इन इंडिया जैसी योजना शामिल है। अब देखना होगा कि भारत सरकार इसमें क्या करती है।
भारत में मार्केट शेयर के हिसाब से कंपनी पिछड़ भी रही थी और उसकी ऑपरेटिंग लागत लगातार बढ़ रही थी , कंपनी ग्राहकों का ध्यान खींचने में लगातार विफल रही है।
फोर्ड अभी भी ज्यादा कीमत में पुराने फीचर के साथ आ रही थी जिसकी कीमतें भी ज्यादा थी ।इससे ग्राहकों का कंपनी से मोह भंग हो गया भी माना जाता है।